वाराणसी हादसे की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौपा, मौतों के लिए बनारस प्रशासन जिम्मेदार


वाराणसी हादसे की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौपा, मौतों के लिए बनारस प्रशासन जिम्मेदार
वाराणसी हादसे की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौपा, मौतों के लिए बनारस प्रशासन जिम्मेदार

वाराणसी : उत्तर प्रदेश सेतु निगम और यातायात विभाग एक दूसरे के ऊपर रूट डायवर्जन को लेकर दोषारोपण कर रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ' अध्यक्ष - राज प्रताप सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त, सदस्य - राजेश मित्तल, प्रबंध निदेशक, यूपी जल निगम, सदस्य - भूपेंद्र शर्मा, प्रमुख अभियंता, सिंचाई विभाग ' ने 15 मौतों के लिए सीधे तौर पर जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। इस चूक को अगर प्रशासन गंभीरता से लेते हुए दूर कर देता तो यह जिंदगियां बचाई जा सकती थी। टीम ने गुरुवार शाम को अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी थी, उसे सीएम को सौंपने की तैयारी चल रही है।


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वाराणसी चौकाघाट से लहरतारा तक निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे कैंट रेलवे स्टेशन से चंद फासले पर मंगलवार को शाम गिरी दो बीम से दबकर 15 लोगों की मौत जबकि 13 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री ने कृषि उत्पादन आयुक्त राजप्रताप सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी को बनारस भेज दिया था। टीम ने मंगलवार की देर रात ही काशी में डेरा डाल दिया। बुधवार सुबह तकरीबन पांच बजे टूटी बीम के नमूने लिये और सर्वे रिपोर्ट तैयार किये।

कमेटी को कैसे नहीं मिले चश्मदीद ?

दोपहर में कई राउंड में टीम ने स्थानीय लोगों व कर्मचारियों से घटनास्थल पर बयान लेने की कोशिश की, लेकिन कोई चश्मदीद उन्हें नहीं मिला। यह बात गुरुवार को देर शाम तैयार हुई विस्तृत जांच रिपोर्ट में टीम ने दर्ज भी की है। टीम ने जब यूपी राज्य सेतु निगम के निलंबित मुख्य प्रोजेक्ट मैनेजर समेत चार अधिकारियों का बयान लिया तो उन्होंने रूट डायवर्जन न होने का दोष यातायात विभाग पर मढ़ा।

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गठित टीम का मानना है कि उन्हें कोई चश्मदीद मौके पर नहीं मिला तो क्या उन्होंने अस्पतालों में भर्ती मरीजों से बात की। 24 घंटे की जांच में भी आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि उन्हें एक भी ऐसा चश्मदीद नहीं मिला, जो यह बता सका कि कैसे जिंदगियों की लौ बुझी।


ट्रैफिक विभाग से इस मसले पर बात की और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि रूट डायवर्जन न होने के पीछे जिला प्रशासन की भूमिका बड़ी है। उनके स्तर से यदि सतर्कता बरती गई होती तो हादसा नहीं होता। टीम के सदस्यों ने बताया कि जांच रिपोर्ट तैयार हो गई है, उसे बहुत जल्द ही मुख्यमंत्री को सौंपने की तैयारी चल रही है।

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टीम ने तकनीकी कसौटी पर पुल के निर्माण को परखा। जो बीम टूटकर गिर गया था, जिसको लेकर गुणवत्ता पर कई सवाल खड़े हो रहे थे, उसमें पाया कि क्वालिटी पर सवाल उठाना गलत होगा। कारण कि बीम उल्टी तरफ गिरी थी, इस तरफ उसका टूटना स्वाभाविक है। 

सुरक्षा मानकों की अनदेखी 

फ्लाईओवर निर्माण करते वक्त सुरक्षा के मानक का एकदम ख्याल नहीं रखा गया है। मजदूर और आसपास चलने वाले लोगों के लिए रास्ता खतरे से कम नहीं है, इसके लिए सेतु निर्माण निगम पर कार्रवाई की जानी चाहिए। टीम ने इस दिशा में बड़े सवाल खड़े किए हैं।


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