पिपराघाट बांध को बोरी व बोल्डर डाल बचाने में जुटे मजदूर

पिपराघाट बांध को बोरी व बोल्डर डाल  बचाने में जुटे मजदूर


कुशीनगर : जनपद के सीमावर्ती क्षेत्रो से गुजरती नारायणी का जलस्तर जरूर कम हुआ है, लेकिन कहर नहीं। हर रोज यह कटान कर रही है और स्लोप का कुछ न कुछ हिस्सा बहा ले जा रही है। 




रविवार को नरवाजोत-पिपराघाट बांध के किमी 1.240 से किमी 1.300 के बीच 60 मीटर स्लोप का हिस्सा नदी में समा गया। कटान स्थलों पर बोरी व बोल्डर डालकर बांध को बचाने में मजदूर जुटे हैं। शनिवार को यहां 15 मीटर स्लोप का हिस्सा नदी में समा गया था।


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यह स्थिति नदी का डिस्चार्ज डेढ़ लाख क्यूसेक से कम होने के चलते हुई है। एक सप्ताह से नदी नरवाजोत-पिपराघाट बांध पर 850 मीटर लंबाई में कटान कर रही है। विभाग लगातार बचाव की कार्रवाई में लगा है, लेकिन नदी के रुख के आगे उसकी एक भी नहीं चल रही है। 

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सहायक अभियंता आमोद कुमार सिंह का कहना है कि कैंप करते हुए युद्ध स्तर पर बोल्डर एवं बोरी से बचाव कार्य कराया जा रहा है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद विभाग हर हाल में बाढ़ की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।


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बाढ़ से बचाव के सभी आवश्यक इंतजाम -  DM कुशीनगर 


DM भूपेंद्र एस चौधरी ने कहा कि बाढ़ से बचाव के सभी उपाय पूर्ण कर लिए गए हैं। प्रभावित गांवों में राशन किट वितरित किए जा रहे हैं। अब तक 3556 पीड़ितों को खाद्यान्न दिए जा चुके हैं। दो तहसीलों में 32815 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में 12 बाढ़ चौकी स्थापित है। एक मोटर वोट तथा एनडीआरएफ की तीन टीमें कार्यरत हैं। चार मेडिकल टीमें व 594 नावों को आमजन की सुरक्षा के लिए लगाया गया है।



इसी तरह बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में छह पशु शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां अभी तक 454 पशुओं को इलाज व 985 पशुओं का टीकाकरण कराया गया है। जलभराव से आठ गांव, बाढ़ से 22 गांव प्रभावित हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अधिशासी अभियंता को सतत निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।



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